
एक ऐतिहासिक दिन जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन आमने-सामने होंगे — अलास्का के एंकोरेज स्थित US आर्मी बेस एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन में।
रात 1 बजे होगी बैठक (IST टाइमिंग)
बैठक भारतीय समय के अनुसार रात 1 बजे शुरू होगी, जिसमें दोनों देशों के फुल डेलीगेशन शामिल होंगे। मुद्दा सिर्फ यूक्रेन युद्ध नहीं, वैश्विक व्यापार, टैरिफ, और भविष्य की भू-राजनीतिक दिशा भी है।
डेलीगेशन कौन-कौन?
रूस की ओर से:
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विदेश मंत्री लावरोव
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उप PM बेलोउसॉव, सिलुआनोव, उशाकोव
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RDIF प्रमुख किरिल दिमित्रिएव
अमेरिका की ओर से:
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उपराष्ट्रपति जेडी वेंस
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सीनेटर मार्को रुबियो, स्कॉट बेसेंट
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सलाहकार स्टीव विटकॉफ
ट्रंप का दावा: “मैं न होता तो यूक्रेन अब तक खत्म हो चुका होता”
ट्रंप का बयान कुछ यूं था:
“अगर मैं राष्ट्रपति न होता तो 2022 में ही रूस पूरे यूक्रेन पर कब्ज़ा कर लेता। मैं नहीं हूं तो यूक्रेन बचा हुआ है!”
साथ ही व्हाइट हाउस की ओर से दावा —
“पहले 5 मिनट में समझ आ जाएगा – मीटिंग कामयाब होगी या फेल।”
मतलब, ये मीटिंग भी शायद Netflix एपिसोड से छोटी हो!
यूक्रेन को नहीं बुलाया गया, लेकिन चर्चा उसी पर
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की इस बैठक में शामिल नहीं हैं।
रूस की डिमांड्स:

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यूक्रेनी सेना को खेरसॉन, डोनेत्स्क, लुगांस्क, जापोरिज्जिया से हटाओ
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NATO में शामिल होने की जिद छोड़ो
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पश्चिमी देशों से हथियार लेना बंद करो
यूक्रेन की मांगें:
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बिना शर्त युद्धविराम
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बच्चों की वापसी जो रूस ने अगवा किए
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युद्धबंदियों की रिहाई
भारत और यूरोप क्यों चिंतित?
भारत पर अमेरिका ने 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है क्योंकि हम रूस से तेल खरीद रहे हैं।
अगर बैठक विफल होती है:
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भारत की अर्थव्यवस्था पर और असर
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यूरोपीय देश भी चिंतित — फ्रांस और UK बोले:
“बिना यूक्रेन, कोई शांति संभव नहीं!”
ट्रंप और पुतिन की ये मुलाकात सिर्फ दो देशों की बातचीत नहीं, पूरी दुनिया की धड़कन है। फैसला सिर्फ युद्ध का नहीं, शांति की परिभाषा का भी है।
क्या ट्रंप की शर्तें और पुतिन की सख्ती के बीच कहीं संतुलन मिलेगा?
या फिर ये मुलाकात 5 मिनट की फोटो-ऑप बन कर रह जाएगी?
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